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 शारीरिक शिक्षा क्या होती है(What is physical education

Physical Education आज हम आपको बहुत ही आसान भाषा में बताएँगे शारीरिक शिक्षा क्या होती है। शारीरिक शिक्षा व्यक्ति का शारीरिक गतिविधियों दवारा शारीरिक ,मानसिक ,नैतिक और सामाजिक विकास करना है। शारीरिक शिक्षा से व्यक्ति के शारीरिक अंगो का विकास होता है। जिससे व्यक्ति  के शरीर की मासपेशियो में लचीलापन (flexivility ) आती है। शारीरिक शिक्षा से व्यक्ति मानसिक रूप से भी मजबूत होता है। जिससे व्यक्ति कोई भी फैसला सोच समझकर तुरंत लेता है। शारीरिक शिक्षा शारीरिक गतिबिधियो दवारा शरीर का विकास करना है।

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शारीरिक शिक्षा (Physical Education)नियमित बृद्धि और विकास है। मासपेशियो और मस्तिष्क के तालमय से कौशल को बढ़ाना है। व्यक्ति की कार्यक्षमता को बढ़ाना है। रुचियों का विकास करना है। खेलो द्वारा तनाब को दूर करना है। दुसरो  प्रति सहानुभूति और सहयोग की भावना को बढ़ाना है। शारीरिक शिक्षा व्यक्ति को समाज का अच्छा व्यक्ति वनाना है। व्यक्ति को आत्म नियंत्रित बनाना है। शारीरिक शिक्षा से नेतृत्व के गुणों का विकास करना है। खेल भावना को जागृत करना। व्याम और खेल सम्बंधित ज्ञान देना। स्वास्थ्य से सम्बंधित समस्याओ को समझना और उनसे बचाब करना सीखना।

आगे हम बात करेंगे -:

शारीरिक शिक्षा का महत्व (Importance )
शारीरिक शिक्षा के उदेश्य (Purpose )
शारीरिक शिक्षा का क्षेत्र (Area )
शारीरिक शिक्षा की विशेषतायें (Characteristics )
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शारीरिक शिक्षा का महत्व(physical Education Importance )-:

1. शारीरिक शिक्षा (Physical Education) से हमें शारीरिक रोगो के बारे में ज्ञान मिलता है।
2. शारीरिक शिक्षा से  व्यक्तित्व में निखार आता है। शारीरिक शिक्षा हमें जटिलताओं और खतरों का का सामना करने योग्य बनाती है।
3. शारीरिक शिक्षा हमें अनुशासित बनाती है। शारीरिक शिक्षा से हमारे अंदर सहानुभूति ,वफादारी त्याग ,सहयोग जैसे गुण आते है।
4. शारीरिक शिक्षा से हमारे मस्तिष्क का विकास होता है। जिससे हमारे सोचने समझने की शक्ति बढ़ जाती है।
5. शारीरिक शिक्षा से हमारा शरीर सुंदर और सुडोल बन जाता है। हमारी कद और काठी में भी परिवर्तन होता है।
6. शारीरिक शिक्षा से ब्यक्ति  समय का सदुपयोग करना सीख़ जाता है।
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 हमारे जीवन में शारीरिक शिक्षा का उदेश्य (Importance of physical education in our life-:)


शारीरिक शिक्षा (Physical Education) का हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व है। शारीरिक शिक्षा एक ऐसा कार्यक्रम है। जिसके तहत हम अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक क्रियाओं के बारे में जानते है। शारीरिक शिक्षा में खेल के अलावा सामाजिक और मानसिक रूप से भी व्यक्ति को सक्षम बनाया जाता है। शारीरिक शिक्षा के ज्ञान से व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों से लडने की शक्ति भी मिलती है। और व्यक्ति शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से अपने शरीर को स्वस्थ रखता भी सीखता है।

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शारीरिक शिक्षा का प्रथम उदेश्य शारीरिक विकास करना है।
शारीरिक शिक्षा का दूसरा उदेश्य सामाजिक विकास करना है।
शारीरिक शिक्षा का तीसरा उदेश्य मनोबैज्ञानिक विकास करना है
शारीरिक शिक्षा का चौथा उदेश्य नैतिक विकास करना है।
शारीरिक शिक्षा का पांचवा उदेश्य ज्ञान में बृद्धि करना है।
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शारीरिक शिक्षा का क्षेत्र (Physical Educationn Area )

शारीरिक शिक्षा (Physical Education) का क्षेत्र बहुत बड़ा है। इस क्षेत्र में शारीरिक क्रिया कलाप और बहुत से खेल आते है। जिनका अभ्यास रोजमर्रा करने से हमारा शरीर लचीला रहता है।
1. शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में तालमय व्याम आते है। जिसमे डंबल ,लेजियम,मार्च पास्ट आदि खेल आते है।
2. शारीरिक शिक्षा में साहसिक खेल आते है जैसे ट्रैकिंग ,वार्टर स्काईंग ,ग्लाइडिंग।
3. इसमें मनोरंजन (entertainment  sports ) खेल भी आते है। शतरंज ,घुड़सबारी ,मछली पकड़ना ,नाब चलाना ,शिकार करना।
4. शारीरिक शिक्षा का क्षेत्र खेल से सम्बंधित है। इसमें दो तरह के खेल आते है व्यक्तिगत खेल और दलीय खेल व्यक्तिगत खेल में बॉक्सिंग तीरंदाजी ,जुडो आदि खेल आते है जबकि दलीय खेल में फूटबाल क्रिकेट ,हॉकी ,कबड्डी,खो खो ,आदि खेल आते है।
5. शारीरिक शिक्षा क्षेत्र में जिमनास्टिक खेल भी आते है। जिसमे बल्टिंग हॉर्स ,ग्राउंड जिमनास्टिक ,रोमन रिंग ,खेल शामिल है।
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शारीरिक शिक्षा की विशेषतायें (Physical Education Characterstics )

शारीरक शिक्षा व्यक्ति को हर परिस्तिथि से निपटने और सामना  करने के लिए तैयार करती है। शारीरिक शिक्षा से व्यक्ति में अनुशाशन की भावना आती है। शारीरिक शिक्षा (Physical Education) से ख़ुशी स्बास्थ्य ,चरित्र का विकास करने में मदद मिलती है। शारीरिक शिक्षा व्यक्ति को सामाजिक व्यबसायिक और नैतिक कार्यो के लिए योग्य बनाती है। शारीरिक शिक्षा से व्यक्ति में सहन शक्ति आ जाती है। शारीरक शिक्षा के क्षेत्र में बहुत से ऐसे अबसर दिए जाते है। जब सहन शक्ति बढ़ाने के अवसर दिए जाते है। जैसे वेट लिफ्टिंग। शारीरिक शिक्षा मानब सम्बन्धो को स्थापित करने में सहायता करता है। एक अच्छा खिलाडी बही होता है। जो खेल को खेल भावना से खेले और दुसरो के साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करे।
शारीरिक शिक्षा द्वारा व्यक्ति को शिक्षित किया जाता है।
शारीरिक शिक्षा से व्यक्ति को विकसित किया जाता है।
शारीरिक शिक्षा दवारा ब्यक्ति का सामाजिक विकास  करना है।
शारीरिक शिक्षा द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व में निखार लाना है व्यक्ति को सामाजिक मानसिक नैतिक रूप से विकसित्त करना है। शारीरिक शिक्षा (Physical Education) में शारीरिक गतिविधियों की योजनावद्ध तरिके से जानकारी देना है।
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लेखक : अजय शर्मा मुझे हिमाचल प्रदेश की न्यूज़ आप तक पहुँचाने के लिए बहुत अच्छा लगता है l हिमाचल की पल - पल की खबर इस वेबसाइट पर हिंदी में पढ़े l

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