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Paper Goose 1 कागज़ का हंस हिंदी कहानी

Paper Goose कागज़ का हंस ।

paper goose एक राजा था । उसकी सात रानियां थीं । बड़ी रानी गर्वभती हुई तो छोटी छहों उससे ईर्ष्या करने लगी । उन्होंने सोचा, अब हमारी अपेक्षा राजा उससे अधिक प्यार करने लगेगा,ज्यादा सुनेगा । वे बड़ी रानी से बदला लेने की सोचने लगी । उन्होंने एक चाल चली और दाई को बुलाकर कहा – तुम हमारा एक काम करो । बदले में तुम्हें ढेर सारा धन मिलेगा ‘। दाई लालच में आ गई । रानियों ने दाई को समझाया कि जब बड़ी रानी को पुत्र हो तो तू बिस्तर में उसके स्थान पर बट्टा(पत्थर )रख देना और अगर लड़की हो तो सिल (चौड़ा पत्थर जिस पर बस्तुएं पीसी जाती हैं) रख देना ।

Paper Goose story कागज़ का हंस

बुढ़िया चालाक थी । वह उनके मन का भांप गई । प्रसवकाल में वह बड़ी रानी के पास गई और कहा-‘ रानी जी ! आप पहली वार बच्चे को जन्म दे रहीं हैं । ऐसा न हो प्रसव पीड़ा से आपकी आंखों की रोशनी चली जाये अतः आंखों को अच्छी तरह बंद कर लें और पट्टी बांध लें और तभी खोलें जब मैं कहूं ‘। रानी उसकी बातों पर विश्वास कर गई और अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली । समय आने पर उसने पुत्र और पुत्री को जन्म दिया । दाई ने चालाकी से उन्हें उठाकर उसके स्थान पर सिल-बट्टा रख दिये और नवजातों को चीथड़ों में लपेटकर नदी किनारे छोड़ आई । उसे विश्वास था कि नदी की लहर उन्हें अपने साथ बहा ले जायेगी । नदी से लौट वह महल में पंहुची और रानी की पट्टी खोल दी । राजा को सूचना हुई । वह रानी के यहां सिल-बट्टे के जन्म का संकेत पाकर बड़ा क्रोधित हुआ । उसने रानी को दी जाने वाली सारी सुविधाएं बंद कर दीं । बेचारी सूखी रोटियां खाकर दिन काटने लगी । Paper Goose

Paper Goose

उधर थोड़ी देर बाद नदी से एक साधु गुजरा । वह चीथड़ों में बच्चों को देखकर बड़ा चकित हुआ । पहले उसने उन्हें छूने में दोष समझा । परंतु बाद में मानवता को धर्म मानकर वह उन्हें उठाकर अपनी कुटिया में ले आया । साधु के पालन पोषण से दोनों बच्चे बड़े हुए । एक दिन साधु को अपनी मृत्यु की याद आई । उसने लड़के को पास बिठाकर एक मंत्र बताया और कहा – ‘ यदि मैं न लौटूं तो मेरी झोली को धूप- टीका देकर इस मंत्र को जपना । यह मंत्र हर विपत्ति में तुम्हारी सहायता करेगा ।’ ऐसा कहकर साधु कुटिया से निकल गया ।
भाई- बहन कुटिया में रहते , रोज़ उसकी प्रतीक्षा करते परंतु वह नहीं लौटा । लड़का अपनी बहन को कुटिया में छोड़कर भीख मांगने जाने लगा । लड़की वन में अकेली रहकर चिंता में सूखने लगी । एक दिन उसने भाई से किसी बस्ती में जाकर रहने का आग्रह किया । वह मान गया और एक दिन दोनों नगर की ओर चल दिए । paper goose
एक दिन लड़का घूमता-फिरता राजदरबार में जा पहुंचा । सभी को उसका सौन्दर्य आकर्षित करने लगा । अतिथि बालक के सौन्दर्य की चर्चा रानियों के कान पड़ी । उनसे रहा नहीं गया । परन्तु जैसे ही उन्होंने उसे देखा – उन्हें अपराध और द्वेष का बिच्छु काटने लगा । उन्हें उसके रंग, रूप,वाक-चातुर्य आदि से पूर्ण विश्वास हो गया कि यह लड़का और कोई नहीं , वही है- जिसे उन्होंने जन्मते ही काल के मुहं में डालने का प्रयास किया था ।
कुलटा स्त्री कहां रुकती है । वे उसे मरवाने का मार्ग ढूंढने लगी । राजदरबार में राजा ने लड़के से प्रश्न किया -‘तुम कौन हो ‘?
लड़के ने कहा – ‘ मैं साधु हूं ‘।
कहां से आये हो ? – राजा ने पूछा ।
‘हम रमते साधु हैं । इच्छा हुई है , आपके राज्य में कुछ समय ठहरा जाए,’- लड़का बोला ।
आप अकेले हो या कोई और भी साथ है – राजा ने पूछा ।
लड़के ने उत्तर दिया – हमारी तो जमात है ।
राजा ने रानियों के कहे अनुसार उसे राज्य से बाहर एक वीरान स्थान बता दिया । साथ ही यह भी कहा – यदि उस स्थान पर सात दिन के भीतर बस्ती न बनी तो मृत्युदंड मिलेगा । लड़के ने स्वीकार कर लिया ।उसने उस स्थान पर जाकर साधु की माला तथा डंडे की पूजा परसना की । उसके प्रताप से वहां महल बन गए । चारों ओर हरियाली छा गई और फल-फूल से लदे वृक्ष लहराने लगे । । राजा को खबर हुई वह बड़ा चकित हुआ । बह लड़के को करामाती साधु समझकर माफी मांगने लगा । बात फैली । रानियों को सब जानकर बड़ी ईर्ष्या हुई । इस लड़के का किस प्रकार प्राणांत हो – वे इसी विचार में सूखने लगी । paper goose
कुछ दिनों के बाद राजदरबार में यज्ञ प्रारम्भ हुआ । दूर – दूर के अतिथि विद्वान आए । साधु लड़का भी बुलाया गया । रानियों ने उसे निकट से देखा । उसे देखकर उन्हें विश्वास हो गया कि यही वह बालक है । राजा ने विद्वानों से रानियों के निसंतान रहने का कारण पूछा । काफी विचार- विमर्श के बाद उन्होंने राजा को बताया – अगर कोई श्याम रंग के फूल इन्हें लाकर दे तो यह मां बन सकती हैं । दूसरा कोई उपचार नहीं ।
राजा की दृष्टि साधु बालक पर गई । राजा ने उससे फूल लाने का प्रस्ताव रखा । लड़के में जनकल्याण की भावना कूट-कूटकर भरी थी । परोपकार के लिए वह प्राण तक देने को तैयार रहता । अतः उसने हां कर दी । राजा ने उसे खाद्य-सामग्री आदि देकर विदा किया । वह घोड़े पर सवार हुआ और बोला —
” चल मेरे घोड़े उड़ता चल ,
श्याम रंगी फूलों के देश में चल,
चल मेरे घोड़े उड़ता चल ‘।
घोड़ा टप -टप करता आसमान से बातें करने लगा ।
घोड़े पर सवार हवा में उड़ता लड़का श्याम रंगी फूलों के देश पहुंचा । उस देश का राजा एक राक्षस था । लड़के ने ज्यों ही वहां की धरती पर कदम रखा , राक्षस मानस-गंध,मानस-गंध कहता मुहं बाए उसकी ओर दौड़ा । लड़का साहसी था । उसने गुरु का स्मरण किया जिनकी कृपा से राक्षस चीखें मारता कोसों दूर भाग गया । लड़के ने फूल तोड़े, घोड़े पर सवार हुआ और राजदरबार में उपस्थित हुआ । राजा उसे देखकर बड़ा प्रसन्न हुआ । रानियों को फूलों के आने की सूचना मिली । वे और जलीं । सोचतीं , वहां यह कालरुपी राक्षस से कैसे बच गया ? राजा ने फूल रानियों को दे दिये पर उनका उनपर कोई प्रभाव नहीं हुआ क्योंकि उनके मन में मैल था ।
राजा फिर से संतान प्राप्ति के उपाय ढूंढने लगा । गहन विचार-विमर्श उपरांत उपचार सामने आया कि अगर राजा जलदेई को ब्याह कर महल में लाए तो संतान हो सकती है । राजा पुनः समस्या ग्रस्त । रानियों को एक और सुअवसर मिलता हुआ नज़र आया । उन्होंने राजा को सलाह दी कि वह साधु लड़के को इस काम के लिए कहे । अंततः राजा को उस लड़के के सामने इस कार्य को करने का प्रस्ताव रखना पड़ा । लड़के ने जलदेई को लाना स्वीकार कर लिया । paper goose
वह अपनी बहन से मिला और घोड़े पर सवार होकर बोला –
“चल मेरे घोड़े उड़ता चल ,
जलदेई जहां हो उस देश चल,
चल मेरे घोड़े रुक न पल ” । paper goose
दिशा संकेत पाकर घोड़ा हवा हो गया । कुछ समय के पश्चात एक विशाल घाटी आई । सामने देवदार के आसपास झूमते पेड़ और बीच में तालाब । लड़का सबकुछ देखकर विस्मित हो गया । इतने में उसे सूनेपन से उभरती एक आवाज़ सुनाई देने लगी । वह आवाज़ धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ती आई । उसका घोड़ा हिनहिनाने लगा और देखते ही देखते पत्थर में बदलने लगा ।लड़के का शरीर भी पत्थर में बदलने लगा। उसने आवाज़ को ललकारा । आवाज़ और समीप आने लगी । लड़के के हाथ – पांव पत्थर होने लगे । उसने तुरंत गुरु का स्मरण किया । गुरु कृपा से वह पुनः मनुष्य रुप में आ गया । घोड़ा हिनहिनाया और अपने रुप में लौट आया । घाटी में उभरती आवाज़ ढलती-ढलती पहाड़ी की ओर सरकती आसमान में खो गई ।धड़ाम से एक शव लुढ़कता हुआ तालाब में समा गया । उसी समय तालाब में से एक जलपरी निकली । उसके हाथ में केसर कटोरी थी । उसने साधु की बंदना की और साथ चलने का आग्रह किया । लड़के ने पूछा – ‘तुम कौन हो ‘?
वह बोली – ‘मैं जलपरी हूं । और वह लुढ़कता हुआ शरीर ,जो अभी-अभी तालाब में समा गया है वह वही दैत्य था जिसने मुझे बन्दी बना रखा था । यहां जो भी आता उस गंभीर आवाज से डर जाता । राक्षसी भाषा सबको पत्थर बना देती । वह देखो ! सामने जितने भी पत्थर पड़े हैं , सभी मनुष्य हैं ‘।
परी की बात सुनकर लड़का बोला – नहीं!विश्वास नहीं हो रहा । परी ने अमृत कुंड पात्र निकाला और सब पत्थरों पर अमृत के छींटे दिए । शिलाएं मनुष्यों में बदल गईं । अनेक राज्यों के राजकुमार परस्पर मिलकर बड़े प्रसन्न हुए । सभी ने परी और साधु लड़के का धन्यवाद किया और अपने-अपने राज्यों को लौट चले । लड़का परी को लेकर राजदरबार पहुंचा । राजा बड़ा चकित था । रानियों को काटो तो खून नहीं । वे अपनी पराजय पर पछताने लगीं । किसी का कुछ वश नहीं चला । paper goose
जलपरी ने आते ही यज्ञ रचने की इच्छा व्यक्त की ।राजा ने यज्ञ के प्रबंध का आदेश दिया ।दूर-दूर से साधु, विद्वान अतिथि बुलाए गए। पशु-पक्षी सभी यज्ञ में आए । दिन ढलने लगा ।
परी ने राजा से प्रश्न किया – ‘महाराज!इस यज्ञ में और तो सभी आए ,परंतु दो जीव नहीं देखे’।
राजा ने पूछा -‘कौन ‘?
परी ने बताया-‘एक तो बड़ी रानी जिसे आपने काल-कोठरी दी है । दूसरा वह कागज़ का हंस (paper goose)जो रानी ने अपने पुत्र को खेलने के लिए रखा था ‘।
राजा ने महात्मा से इस बात की पुष्टि की तथा दोनों को बुलाने का हुक्म दिया । दोनों यज्ञ में आए । रानी तथा हंस को भोजन परोसा गया । परंतु दोनों ने भोजन नहीं किया । राजा ने हंस (paper goose)को मोती भी डाले । परंतु सब व्यर्थ । इससे परी को समय मिला । उसने राजा को संबोधित करते कहा – ‘ महाराज!जब यह कागज़ का हंस मोती नहीं चुगता तो भला रानी कैसे सिल-बट्टे को जन्म दे सकती है ‘। राजा चकित रह गया । उसकी समझ में बात नहीं आई । परी ने सारा इतिहास राजा के सामने रखा । उसने बताया – ‘ निष्कासिता तुम्हारी महारानी है । यह महात्मा उसके पुत्र और वह पुत्री और मैं आपकी बहु हूं ‘। राजा को अपने किए पर बड़ा पश्चाताप हुआ । उसने दुष्ट रानियों को मृत्युदंड दिया और अपने परिवार के साथ सुख से रहने लगा ।
paper goose
भावानुवाद व प्रस्तुति – दुर्गेश नंदन ।
संकलन-डा. गौतम शर्मा व्यथित ।
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लेखक : अजय शर्मा मुझे हिमाचल प्रदेश की न्यूज़ आप तक पहुँचाने के लिए बहुत अच्छा लगता है l हिमाचल की पल - पल की खबर इस वेबसाइट पर हिंदी में पढ़े l

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