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Ganesh Chaturthi 2020 गणेश चतुर्थी कब है, कथा व् पूजा विधि

ganesh chaturthi 2020
गणेश चतुर्थी 

 

 
 
आज हम आपको Ganesh chaturthi 2020 शुभ मुहूर्त , कथा व् पूजा के बारे में बतायेंगे l गणेश चतुर्थी  पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 11:05 से 01:41 तक यानि कुल मिलाकर 2 घंटे 35 मिनट का समय है l Ganesh chathurati 2020  का पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जायेगा क्यूंकि हमारे ग्रंथो में एसी मान्यता है  कि श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, सोमवार, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था। इसलिए यह चतुर्थी मुख्य गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहलाती है l
 
गणेश शब्द का पूर्ण अर्थ इस प्रकार है ,गणका अर्थ हैवर्ग, समुदाय औरईशका अर्थ हैस्वामी। शिवगणों और देवगणों के स्वामी होने के कारण इन्हेंगणेशकहते हैं।
 
श्री गणेश जी के बारह प्रसिद्ध नाम बताए गए हैं; जो इस प्रकार हैं: 1. सुमुख, 2. एकदंत, 3. कपिल, 4. गजकर्ण, 5. लम्बोदर, 6. विकट, 7. विघ्नविनाशन, 8. विनायक, 9. धूम्रकेतु, 10. गणाध्यक्ष, 11. भालचंद्र, 12. गजानन।
 

गणेश चतुर्थी 2020 कब है- (Ganesh Chaturthi 2020 Date)

Ganesh chaturthi 2020 में 22 अगस्त दिन शनिवार के दिन है l इस बार गणेश चतुर्थी शनिवार के दिन दोपहर में 2 घंटे 35 मिनट रहेगी l इस दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष है l गणेश गणपति जी का जन्म इसी पक्ष में हुआ था l आप भी गणेश चतुर्थी के दिन यानी शनिवार को व्रत रखकर अपने पापो से मुक्ति पा सकते है l
 

गणेश चतुर्थी 2020 शुभ मुहूर्त– (Ganesh chathurati 2020 subh muhurat)

§  Ganesh chaturthi 2020 पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 11:05 से 01:41 तक यानि कुल मिलाकर 2 घंटे 35 मिनट का समय
§  गणेश चतुर्थी के शुभ मुहूर्त की बात करे तो मध्याह्न के समय चतुर्थी ली जाती है।
§  गणेश चतुर्थी के दिन गलती से भी चंद्रमा के दर्शन नही करने चाहिए l
§  अगर गलती से दर्शन हो भी जाते है l तो आपको इसका दोष निवारण करवाना पड़ता है l
 

गणेश चतुर्थी महत्व-(Ganesh Chaturthi Importance )

इसके पीछे भी एक प्राचीन कहानी है l  एक समय की बात है जब भगवान Shri Krishan पर स्यमन्तक मणि चोरी करने का झूठा कलंक लग गया था  और वे अपमानित हुए थे। Naradji ने उनकी यह दुर्दशा देखकर उन्हें बताया कि उन्होंने भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्थी को गलती से चंद्र दर्शन किया था। इसलिए वे कलंकित हुए हैं। नारद मुनि ने उन्हें यह भी बताया कि इस दिन चंद्रमा को Ganesh Ji  ने श्राप दिया था। इसलिए जो इस दिन चंद्र दर्शन करता है उसपर मिथ्या कलंक लगता है। नारद मुनि की सलाह पर श्रीकृष्ण जी ने गणेश चतुर्थी का व्रत किया और दोष मुक्त हुए। इसलिए इस दिन पूजा व्रत करने से व्यक्ति को झूठे आरोपों से मुक्ति मिलती है l
 
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गणेश कथा 

एक समय की बात है l जब माता पार्वती जी स्नान करने के लिए जा रही थीं। तब माता पार्वती जी ने अपने शरीर के मैल से एक पुतले का निर्माण किया l और उसमें प्राण डालकर घर की रक्षा के लिए उसे द्वारपाल गणेश के रूप में नियुक्त किया। गृह में प्रवेश के लिए आने वाले शिवजी को उन्होंने रोका तो शंकरजी ने रुष्ट होकर युद्ध में उनका मस्तक काट दिया। जब पार्वती जी को इसका पता चला तो वह दुःख के मारे विलाप करने लगीं। माता पार्वती जी को  प्रसन्न करने के लिए शिवजी ने गज(हाथी) का सर काटकर गणेश जी के धड़ पर जोड़ दिया। गज का सिर जुड़ने के कारण ही उनका नाम गजानन पड़ा।
 

गणेश चतुर्थी पूजा विधि

  ग    गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करने के बाद सोने, तांबे, मिट्टी की गणेश जी की प्रतिमा लें।

एक कोरे कलश में जल भरकर उसके मुंह पर कोरा वस्त्र बांधकर उसके ऊपर गणेश जी को विराजमान करें।

गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बाँट दें।

सांयकाल के समय गणेश जी का पूजन करना चाहिए। गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चालीसा व आरती पढ़ने के बाद अपनी दृष्टि को नीचे रखते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।

इस दिन गणेश जी के सिद्धिविनायक रूप की पूजा व व्रत किया जाता है।

गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करने का विधान है। मतान्तर से गणेश जी की तीन परिक्रमा भी की जाती है।

ध्यान रहे कि तुलसी के पत्ते (तुलसी पत्र) गणेश पूजा में इस्तेमाल नहीं हों। तुलसी को छोड़कर बाकी सब पत्र-पुष्प गणेश जी को प्रिय हैं

 

गणेश विसर्जन की तारीख जानिये – (Ganesh Visarjan 2020)

गणेश विसर्जन गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद है l इस बार गणेश चतुर्थी 22 अगस्त दिन शनिवार को है l तो गणपति विसर्जन गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद यानि 11 वे दिन 1 सितम्बर दिन मंगलवार को होगा l इस दिन गणपति जी की मूर्ति या प्रतिमा को पानी में विसर्जित किया जायेगा l इस बार गणपति विसर्जन के लिए चार गाडियों का शुभ मुहूर्त है l
·        पहली घडी शुभ मुहूर्त 1 सितम्बर 2020 को गणेश विसर्जन के लिए सुबह 9 बजकर 10 मिनट से दोपहर 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगा l
·        दूसरी शुभ घडी 1 सितम्बर 2020 दोपहर 3 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट रहेगी l
·        तीसरी शुभ घडी 1 सितम्बर 2020 रात 8 बजकर 7 मिनट से 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगी
·        चोथी और अंतिम सुभ घड़ी 1 सितम्बर 2020 रात को 10 बजकर 56 मिनट से सुबह के समय 3 बजकर 10 मिनट 2 सितम्बर 2020  तक रहेगी
 
Ganesh Chaturthi 2020  पुरे भारत में धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पर्व है। किसी भी धार्मिक कार्य के पूर्व करने से पहले श्री गणेश जी का नाम लिया जाता है l ऐसी मान्यता है कि गणेश पूजा के बिना कोई भी धार्मिक कार्य को शुरु नहीं किया जाता है। शास्त्रों में इनकी पूजा सबसे पहले करने का स्पष्ट आदेश है। यह प्रथा प्राचीनकाल से ही चली रही है l गणेश जी वैदिक देवता हैं क्योंकि ऋग्वेदयजुर्वेद आदि में गणपति जी के मन्त्रों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। शिवजी भगवान् ने गणेश जी की ये आशीर्वाद दिया था l कि जब भी कोई धार्मिक कार्य शुरू होगा l सबसे पहले गणेश जी को पूजा जायेगा l

 

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लेखक : अजय शर्मा मुझे हिमाचल प्रदेश की न्यूज़ आप तक पहुँचाने के लिए बहुत अच्छा लगता है l हिमाचल की पल - पल की खबर इस वेबसाइट पर हिंदी में पढ़े l

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